Expressions: Poetry & Motivational Thoughts..


Original Photo of Rani Lakshmibai

4 comments:

  1. 'अग्निपथ': A source of inspiration in my life..

    I’m sharing a very beautiful and inspirational poem of Dr. Harivansh Roy Bachchan. I heard it first in the Hindi movie “Agnipath” and, since then, it has become my source of inspiration and I recite it to accept the challenges I face in my everyday’s life. It gives me immense strength to fulfill my commitments (तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ) and I hope you’ll also be filled with strength the moment you recite it.

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    वृक्ष हो भले खड़े,
    हों घने, हों बड़े,
    एक पत्र छांह भी
    मांग मत, मांग मत, मांग मत.
    अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |

    तू न थकेगा कभी,
    तू न थमेगा कभी,
    तू न मुड़ेगा कभी,
    कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
    अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |

    यह महान दृश्य है,
    चल रहा मनुष्य है,
    अश्रु, श्वेद, रक्त से
    लथपथ, लथपथ, लथपथ,
    अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |

    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    - डॉ. हरिवंश रॉय बच्चन

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  2. The time has come to recall another beautiful and inspirational poem of Subhadra Kumari Chauhan.

    We can die with honor or live with disgrace; the choice is ours!

    सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
    बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
    गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
    दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
    चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
    कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
    लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
    नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
    वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी,
    लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
    देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
    महाराष्टर-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
    ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
    राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
    चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
    किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
    तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
    रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।
    निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
    राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
    फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
    लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।
    अश्रुपूर्णा रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,
    व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
    डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
    राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।
    रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
    कैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घात,
    उदैपुर, तंजौर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात?
    जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।
    बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    रानी रोयीं रिनवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
    उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
    सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,
    'नागपूर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।
    यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
    यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
    झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
    मेरठ, कानपूर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
    जबलपूर, कोल्हापूर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
    नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
    अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
    भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।
    लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
    जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
    लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में,
    रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वन्द्ध असमानों में।
    ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
    घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
    यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
    विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।
    अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
    अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
    काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
    युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।
    पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
    किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
    घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये अवार,
    रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।
    घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
    बुंदेले …. ।।
    रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
    मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
    अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
    हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,
    दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
    (N.B.: I regret for some lines that had to be deleted because of space constraint)

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  3. 3 Nice Stories:

    1. Once, all villagers decided to pray for rain. On the day of prayer, all the people gathered and only one small boy came with an umbrella.
    That’s the FAITH !

    2. Example of feeling of one year old baby- when you throw him up in the air, he laughs because he knows you will catch him.
    That’s the TRUST !

    3. Every night we go to bed. We have no assurance to wake up alive the next morning but still we keep alarm for the next day.
    That’s the HOPE !

    So, have FAITH in God, TRUST in yourself and HOPE for the best….

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  4. Yes Indeed, Faith is taking the first step even when you cannot see the whole staircase!!

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